इश्क करू या इबादत दोनों में तू ही नजर आती है,
मेरी रूह भी अब मेरी नहीं इसमें भी तू समायी रहती है...
इश्क करू या इबादत दोनों में तू ही नजर आती है,
मेरी रूह भी अब मेरी नहीं इसमें भी तू समायी रहती है...
तेरी निगाहों ने दीवाना बनाया मुझे,अब इन निगाहों में बसा ले मुझे,
खो ना जाँऊ दुनियाँ की भीड़ में अपने आगोश में छुपा ले मुझे...
उसकी आंखे उसकी जुल्फें उसकी अदाएं उसके इशारे उसका इठलाके शरमाना,
कभी फूलों सा मुस्कुराना कभी घबराकर मेरी बाँहों में सिमट जाना...
बहुत याद आता है...💓
ये जो जुल्फें मेरे माशूक ने लहराई है मानों आसमान में घटा सी छाई है,
डूब रहे हैं हम उनके इश्क़ में धड़कनें भी अब बढ़ आई हैं...❤️