मेरा इश्क एक शाम का नही है,तेरी तन्हाइयों में बेनाम सा नही है...
तू मुक्कमल जहां है मेरा,तेरे बिना कोई अरमान नही है...
मेरा इश्क एक शाम का नही है,तेरी तन्हाइयों में बेनाम सा नही है...
तू मुक्कमल जहां है मेरा,तेरे बिना कोई अरमान नही है...
तेरी चाहत में तन्हाई हर रात मिलेंगी...
तेरी यादों से रिहाई मौत के बाद मिलेगी...
तुझे भी रुसवाई मेरे बाद मिलेगी...
आज भी जब गुजरता हूँ उन राहों से जिन राहों पर तुम मिलती थी...
वहाँ तुम्हारे होने का एहसास आज भी महसूस होता है...