Tuesday, July 28, 2015
Thursday, July 16, 2015
मेरे देश की धरती, सोना उगले, उगले हीरे मोती बैलों के गले में जब घुँगरू, जीवन का राग सुनाते हैं गम कोस दूर हो जाता है, खुशियों के कंवल मुसकाते हैं सुन के रहट की आवाज़े यूँ लगे कही शहनाई बजे आते ही मस्त बहारों के दुल्हन की तरह हर खेत सजे जब चलते हैं इस धरती पे हल, ममता अंगडाईयाँ लेती है क्यो ना पूजे इस माटी को जो जीवन का सुख देती है इस धरती पे जिस ने जनम लिया, उसने ही पाया प्यार तेरा यहा अपना पराया कोई नही, है सब पे माँ उपकार तेरा ये बाग है गौतम नानक का, खिलते हैं अमन के फूल यहाँ गाँधी, सुभाष, टैगोर, तिलक ऐसे हैं चमन के फूल यहाँ रंग हरा हरीसिंग नलवे से, रंग लाल है लाल बहादूर से रंग बना बसंती भगतसिंग, रंग अमन का वीर जवाहर से...
Tuesday, June 30, 2015
Friday, June 26, 2015
Wednesday, June 10, 2015
Monday, February 16, 2015
Saturday, October 11, 2014
कलम उठा ही ली है अब तो, भारत कि जयकार लिखूंगा। सौ करोड़ हिन्दुस्तानियोँ का मैँ तो हाहाकार लिखूंगा। रोते बिलखते भारत का मजदुर और किसान लिखूंगा। भूखे नगें गरीबोँ का दर्द में बारम्बार लिखूंगा। बेरोजगार युवाओँ का मजबूर हर हाल लिखूंगा। भारत कि जनता के ऊपर होते अत्याचार लिखूंगा ।।
Thursday, August 21, 2014
Tuesday, July 8, 2014
Tuesday, July 1, 2014
Monday, June 23, 2014
Thursday, May 22, 2014
Tuesday, April 29, 2014
Saturday, April 26, 2014
Tuesday, April 8, 2014
“हर मित्रता के पीछे कोई स्वार्थ जरूर होताहै –यह कडुआ सच है.दुनिया की सबसे बड़ी ताकत पुरुष का विवेक और महिला की सुन्दरता है.काम का निष्पादन करो ,परिणाम से मत डरो.सुगंध का प्रसार हवा के रुख का मोहताज़ होता है पर अच्छाई सभी दिशाओं में फैलती है.ईश्वर चित्र में नहीं चरित्र में बसता है अपनी आत्मा को मंदिर बनाओ.व्यक्ति अपने आचरण से महान होता है जन्म से नहीं,ऐसे व्यक्ति जो आपके स्तर से ऊपर या नीचे के हैं उन्हें दोस्त न बनाओ,वह तुम्हारे कष्ट का कारण बनेगे. सामान स्तर के मित्र ही सुखदाई होते हैं .”
Wednesday, April 2, 2014
समय, सफलता की कुंजी है। समय का चक्र अपनी गति से चल रहा है या यूं कहें कि भाग रहा है। अक्सर इधर-उधर कहीं न कहीं, किसी न किसी से ये सुनने को मिलता है कि क्या करें समय ही नही मिलता। वास्तव में हम निरंतर गतिमान समय के साथ कदम से कदम मिला कर चल ही नही पाते और पिछङ जाते हैं। समय जैसी मूल्यवान संपदा का भंडार होते हुए भी हम हमेशा उसकी कमी का रोना रोते रहते हैं क्योंकि हम इस अमूल्य समय को बिना सोचे समझे खर्च कर देते हैं। विकास की राह में समय की बरबादी ही सबसे बङा शत्रु है। एक बार हाँथ से निकला हुआ समय कभी वापस नही आता है.
Tuesday, March 11, 2014
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