ज़माने में नहीं है मुफलिसी के तलबगार...
छोड़ जाते है अपने भी बीच बाजार...
हो पास खज़ाना तो हो जाते सब खिदमतगार...
सोच कर करना अब ज़माने में ऐतबार...
ज़माने में नहीं...
उन्होंने जब अपने चेहरे से नकाब हटा दिया...
उस रात को चांदनी रात बना
दिया...
मदहोश हो गये उस नूर को देखकर...
होश आने के लिए उन्होंने फिर अपना नकाब
सरका दिया...
जब हमारे जीवन में जब सुख आता है
तो बहुत इंसानो को साथ ले आता है.
लेकिन अगर जीवन में दुःख आता है
तो सिर्फ अपनों को पास छोड़ जाता है
कभी हसना है, कभी रोना है
जीवन सुख दुःख का संगम है ...
तुम्हारी जुल्फों के साये मे तहाँ उम्र रहना चाहता हूँ...
तुम रहो पास तो मै तुममे खो जाना चाहता हूँ...
जिंदगी सँवर गई तुमसे मिलके...
तुम बिन अब नहीं रहना चाहता हूँ...