जो छोड़ते है किसी को वो अच्छे नहीं होते...
प्यार करने वाले सभी सच्चे नहीं होते...
मिलती नहीं सच्ची मोहब्बत हर किसी को...
जिंदगी के सभी सफर अच्छे नहीं होते...
मै भी क़र्ज़दार हूँ हुस्न वालों का...
बेचा है जिसको ज़माने ने बाजार में...
मै भी क़र्ज़दार हूँ...
वो खरीदते रहे और रौंदते रहे उन के जज़्बातो को...
और हम देखते रहे उनके हालातो को...
मै भी क़र्ज़दार हूँ...
वो देश की शान है मगर आज वो खुद से भी अंजान है...
दिल टूटने की आवाज़ कहाँ होती है...
मिट जाती है जिंदगी आबाद कहाँ होती है...
फिर चलती है जिंदगी बेजुबां की तरह...
फिर उसमें आवाज़ कहाँ होती है...
दिल टूटने की आवाज़...
हमने मोहब्बत को छोड़ा,लेकिन एहसास को ना छोड़ पाए...
जिंदगी के तंगे हालात में भी उसको ना भूल पाए...
याद आती है उनकी तो आ जाते है आंसू...
हम उनको भूल कर भी ना भूल पाए...
हमने मोहब्बत को छोड़ा...
वफा कि उम्मीद थी जिनसे,वो भरी महफिल मे रूसवा कर गये...
हमने चाहा जिसे वो हमें छोड़ किसी और के साथ निकल गये...
खुश रहे वो सदा ये दुआं हम फिर भी कर गये...
ज़माने में नहीं है मुफलिसी के तलबगार...
छोड़ जाते है अपने भी बीच बाजार...
हो पास खज़ाना तो हो जाते सब खिदमतगार...
सोच कर करना अब ज़माने में ऐतबार...
ज़माने में नहीं...
उन्होंने जब अपने चेहरे से नकाब हटा दिया...
उस रात को चांदनी रात बना
दिया...
मदहोश हो गये उस नूर को देखकर...
होश आने के लिए उन्होंने फिर अपना नकाब
सरका दिया...